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धर्मको उत्पत्ति र विकास सम्बन्धी मार्क्सवादी धारणा - copied FRom Left Review Online

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विश्वमा धर्म सम्बन्धी मार्क्सवादी धारणालाई लिएर निकै ठूलो बहस र बिवाद लामो समयदेखि निरन्तर चल्दै छ । यस क्रममा मूलतः धर्म सम्बन्धी मार्क्सवादी अवधारणालाई जन साधारणको सामान्य धारणा सन्दर्भबाट अलग्याएर प्रस्तुत गर्ने गरिँदै आएको छ । त्यसको एउटा ठोस उदाहरण हो ‘धर्म जनताको अफिम हो’ भन्ने उद्धरण । साँचो र यथार्थ कुरा त के हो भने यस उदाहरणलाई मार्क्सवादका विरुद्ध दुरुपयोग गर्नेहरुले जानिबुझिकनै त्यसको पूरा सन्दर्भ नदिई आंशिकरुपमा त्यसलाई प्रस्तुत गर्दै र ठूलो भ्रम फिजाउँदै आएका छन् । यो भ्रान्त धारणबाट मुक्त हुनु पनि कम्युनिस्ट तथा प्रगतिशील अग्रगामी आन्दोलन र आन्दोलनकारीहरुका निमित्त एकदमै महत्त्वपूर्ण कुरा हो । निश्चय नै अरु दर्शनहरुले जस्तो मार्क्सवादले संसारलाई बुझ्ने र ब्याख्या गर्ने कुरामा मात्र आफूलाई सीमित राख्दैन । यस दर्शनले त संसारलाई आमूल परिवर्तन गरेर अग्रगामी सामाजिक रुपान्तरण गर्ने महत्त्वपूर्ण कुरामा सर्वाधिक जोड दिन्छ । त्यसै कारणले मार्क्सवादका प्रणेता कार्ल मार्क्सले भने – ‘दार्शनिहरुले आजसम्म संसार यस्तो छ उस्तो छ भनेर ब्याख्या मात्र गरे, मूल कुरो...

मैं नास्तिक क्यों हूँ?" - शहीद भगत सिंह----Must Read!

मैं नास्तिक क्यों हूँ?" - शहीद भगत सिंह Must Read! Dr. Kumar Vishwas · २०१७ मार्च २३, बिहिबार · एक नया प्रश्न उठ खड़ा हुआ है। क्या मैं किसी अहंकार के कारण सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी तथा सर्वज्ञानी ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करता हूँ? मेरे कुछ दोस्त – शायद ऐसा कहकर मैं उन पर बहुत अधिकार नहीं जमा रहा हूँ – मेरे साथ अपने थोड़े से सम्पर्क में इस निष्कर्ष पर पहुँचने के लिये उत्सुक हैं कि मैं ईश्वर के अस्तित्व को नकार कर कुछ ज़रूरत से ज़्यादा आगे जा रहा हूँ और मेरे घमण्ड ने कुछ हद तक मुझे इस अविश्वास के लिये उकसाया है। मैं ऐसी कोई शेखी नहीं बघारता कि मैं मानवीय कमज़ोरियों से बहुत ऊपर हूँ। मैं एक मनुष्य हूँ, और इससे अधिक कुछ नहीं। कोई भी इससे अधिक होने का दावा नहीं कर सकता। यह कमज़ोरी मेरे अन्दर भी है। अहंकार भी मेरे स्वभाव का अंग है। अपने कामरेडो के बीच मुझे निरंकुश कहा जाता था। यहाँ तक कि मेरे दोस्त श्री बटुकेश्वर कुमार दत्त भी मुझे कभी-कभी ऐसा कहते थे। कई मौकों पर स्वेच्छाचारी कह मेरी निन्दा भी की गयी। कुछ दोस्तों को शिकायत है, और गम्भीर रूप से है कि मैं अनचाहे ही अपन...